शक के बादलों
पर्वतो में
मत बदल जाना,
समर्पण के महल मेरे
आंसूओं में
मत पिघल जाना ।
अपने आबिद को सम्भाल-
मेरे माबूद,
मैने मुड़ के वापस नही आना ।।
शक के बादलों
पर्वतो में
मत बदल जाना,
समर्पण के महल मेरे
आंसूओं में
मत पिघल जाना ।
अपने आबिद को सम्भाल-
मेरे माबूद,
मैने मुड़ के वापस नही आना ।।
बे-हिसाब इश्क़
दो शबाबों का मिश्रण, शराब हो गया।
तेरी खुशबू से मैं भी, गुलाब हो गया।।
इश्क़ तो पहले भी था , हसीन था
अब बे-हिसाब, अब ला-जवाब हो गया ।।