मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

बे-हिसाब इश्क़

        बे-हिसाब इश्क़ 


दो शबाबों का मिश्रण, शराब हो गया।

तेरी खुशबू से मैं भी, गुलाब  हो  गया।।


इश्क़  तो पहले भी था , हसीन था 

अब बे-हिसाब, अब ला-जवाब हो गया ।। 

                     अवध कुमार.....✍️


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